डायबिटीज़ यानी मधुमेह आज के समय की सबसे आम बीमारियों में से एक बन चुकी है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह बीमारी अचानक नहीं आती — इससे पहले शरीर हमें कई तरह के संकेत देता है, लेकिन ज़्यादातर लोग इन्हें थकान, उम्र या मौसम का असर समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर समय रहते इन लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो डायबिटीज़ को शुरुआती स्टेज (जिसे प्री-डायबिटीज़ कहते हैं) में ही रोका जा सकता है या इसका असर काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि डायबिटीज़ होने से पहले शरीर कौन-कौन से संकेत देता है, इन्हें कैसे पहचानें और किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।
प्री-डायबिटीज़ वह स्थिति है जब खून में शुगर (ग्लूकोज़) का स्तर सामान्य से ज़्यादा होता है, लेकिन इतना ज़्यादा नहीं कि उसे टाइप-2 डायबिटीज़ कहा जा सके। यह एक तरह की "वॉर्निंग स्टेज" होती है। सही खान-पान, एक्सरसाइज़ और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इस स्टेज में डायबिटीज़ को पूरी तरह टाला जा सकता है।
अगर आपको सामान्य से ज़्यादा और बार-बार प्यास लगती है, और पानी पीने के बाद भी गला सूखा-सूखा महसूस होता है, तो यह ब्लड शुगर बढ़ने का एक अहम संकेत हो सकता है।
जब शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, तो किडनी उसे बाहर निकालने की कोशिश करती है, जिससे पेशाब ज़्यादा और बार-बार आने लगता है — खासकर रात के समय।
अगर पूरी नींद लेने के बाद भी शरीर में एनर्जी की कमी महसूस होती है और छोटे-छोटे काम करने में भी थकान लगती है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज़ सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा।
ब्लड शुगर बढ़ने से आंखों के लेंस पर असर पड़ता है, जिससे नज़र धुंधली या हल्की-फुल्की धुंधली महसूस होने लगती है। यह लक्षण अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
अगर शरीर पर लगी कोई चोट, कट या घाव सामान्य से ज़्यादा समय ले रहा है ठीक होने में, तो यह भी ब्लड शुगर बढ़ने का एक संकेत माना जाता है, क्योंकि हाई शुगर लेवल खून के बहाव और घाव भरने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
बिना किसी खास वजह के वज़न तेज़ी से घटना या बढ़ना, दोनों ही डायबिटीज़ की शुरुआती निशानी हो सकते हैं। शरीर जब ग्लूकोज़ को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो वह मांसपेशियों और फैट को तोड़ने लगता है।
खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही दोबारा भूख महसूस होना भी एक संकेत हो सकता है, क्योंकि शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज़ सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता।
अगर हाथों या पैरों में बार-बार झनझनाहट, सुन्नपन या चुभन जैसा महसूस होता है, तो यह नर्व्स पर बढ़ते शुगर लेवल के असर का संकेत हो सकता है।
गर्दन, बगल या कोहनी जैसे हिस्सों में त्वचा का रंग गहरा होना (जिसे मेडिकल भाषा में "एकैंथोसिस निग्रिकंस" कहा जाता है) भी इंसुलिन रेज़िस्टेंस का एक जाना-पहचाना संकेत है।
शरीर में पानी की कमी के कारण मुंह बार-बार सूखने लगता है और त्वचा रूखी होकर खुजली करने लगती है।
शुरुआत में ये लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोग इन्हें सामान्य कमज़ोरी या थकान समझ लेते हैं। लेकिन अगर इन पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर यह टाइप-2 डायबिटीज़ का रूप ले सकते हैं, जिससे हृदय, किडनी, आंखों और नसों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
डायबिटीज़ अचानक नहीं होती — शरीर बहुत पहले से ही हमें इशारे देना शुरू कर देता है। ज़रूरत है तो बस इन संकेतों को समय रहते पहचानने और सही कदम उठाने की। अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी आपको बार-बार महसूस हो रहा हो, तो नज़रअंदाज़ न करें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करके ब्लड शुगर टेस्ट ज़रूर कराएं। समय पर पहचान और सही लाइफस्टाइल अपनाकर डायबिटीज़ को काफी हद तक टाला जा सकता है।
नोट: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी लक्षण के बारे में सही निदान और इलाज के लिए हमेशा योग्य डॉक्टर से सलाह लें।